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बंगाल की वास्तुकला- पाल एवं सेन शैली | Architecture of Bengal- Pala and Sen style

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बंगाल क्षेत्र में विकसित वास्तुशिल्प कला को पाल एवं सेन वास्तुशिल्प शैली के नाम से जाना जाता है। 8 वीं से 12 वीं शताब्दी ईसवी के मध्य विकसित इस वास्तुशिल्प कला को पाल एवं सेन शासकों ने संरक्षण प्रदान किया। पाल शासक मुख्य रूप से बौद्ध थे। उन्होंने बौद्ध धर्म की महायान परंपरा को आगे बढ़ाया। ये शासक बहुत सहिष्णु थे। इन्होंने दोनों धर्मों को संरक्षण प्रदान किया। पाल शासकों ने अपने शासनकाल में बहुत से विहारों, चैत्यों और स्तूपों का निर्माण करवाया। सेन शासक हिन्दु थे। उन्होंने हिन्दु देवी-देवताओं के अंतर्गत मंदिर बनवाये और बौद्ध परंपरा को भी जीवंत रखा। अतः वास्तुकला की इस शैली में दोनों धर्मों से संबंधित वस्तुकला परिलक्षित होती है।

The architectural art developed in the Bengal region is known as Pala and Sen architectural style. The Pala and Sen rulers patronized this architectural art developed between the 8th to the 12th century AD. The Pala rulers were predominantly Buddhist. He carried forward the Mahayana tradition of Buddhism. These rulers were very tolerant. He patronized both the religions. The Pala rulers built many viharas, chaityas and stupas during their reign. The Sen rulers were Hindus. They built temples under Hindu deities and kept the Buddhist tradition alive. Therefore, this style of architecture reflects the architecture related to both the religions.

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पास शासकों के अधीन बनवाये गये स्मारक थे-
पाल शासकों के संक्षरण में नालंदा, जगद्दल, ओदंतपुरी एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालयों का विकास हुआ। पाल शासकों ने सोमपुर महाविहार नामक भव्य मठ की स्थापना की थी।

The monuments built under the nearby rulers were-
The universities of Nalanda, Jagaddal, Odantapuri and Vikramshila developed under the patronage of the Pala rulers. The Pala rulers established a grand monastery called Sompur Mahavihara.

सेन शासकों के अधीन बनवाये गये स्मारक थे-
सेन शासकों ने ढाकेश्वरी मंदिर बनवाया था।

The monuments built under

Sena rulers were-
The Dhakeshwari temple was built by the Sena rulers.

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सेन वास्तुकला शैली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. बाँस की झोपड़ियों की छतों के समान भवनों की छतों को वक्राकार या ढलुआ बनाया जाता था। इसे लोकप्रिय रूप से बंग्ला छत कहा जाता है। आगे चलकर इसे मुगल वास्तुकता द्वारा अपना लिया गया।
2. पक्की ईंटें एवं मिट्टी जिन्हें टेराकोटा कहा जाता था, भवन निर्माण में प्रयुक्त की जाने वाली प्रमुख सामग्री थी।
3. मंदिरों के शिखर लंबे एवं वक्राकार होते हैं। उनके शीर्ष पर विशाल ओडिसा शैली सदृश आमलक बनाये जाते थे।
4. मंदिरों की मूर्तियाँ प्रमुख रूप से प्रस्तर एवं धातुओं में निर्मित की जाती थीं। पाषाण मुख्य निर्माण सामग्री थी।
5. इस शैली के मंदिरों की मूर्तियाँ अपनी अत्यधिक चमकदार फिनिसिंग के लिए प्रसिद्ध हैं।
उदाहरण- बराकर का सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, विष्णुपुर (पश्चिम बंगाल) के आसपास के मंदिर आदि।

The main characteristics of Sen architectural style are-
1. Like the roofs of bamboo huts, the roofs of buildings were made curvilinear or sloping. It is popularly called as Bangla Chhat. Later it was adopted by the Mughal architecture.
2. Paved bricks and clay called terracotta were the main materials used in building construction.
3. The shikharas of the temples are long and curved. On top of them huge amalakas resembling the Orissa style were made.
4. The idols of the temples were mainly made in stone and metals. Stone was the main building material.
5. The sculptures of the temples of this style are famous for their highly lustrous finishing.
Examples-Siddheshwar Mahadev Temple of Barakar, Temples around Vishnupur (West Bengal) etc.

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आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों / विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
R F Temre
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(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
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