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मौर्य काल की लोकप्रिय कला | Popular Art of the Mauryan Period

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राजकीय संरक्षण प्राप्त कला के अतिरिक्त गुफा स्थापत्य कला, मूर्तिकला एवं मृद्भांड की पहल से भी कला को अभिव्यक्ति मिली। गुफा, मूर्तिकला एवं मृद्भांड को लोकप्रिय कला के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।

In addition to the state-protected art, the art also got expression through the initiatives of cave architecture, sculpture and pottery. cave, sculpture and pottery can be classified as popular art.

गुफा स्थापत्य कला- तत्कालीन समय में गुफा स्थापत्य कला का उद्भव हुआ। मौर्य काल की इन गुफाओं को पत्थर काटकर निर्मित किया जाता था। इन गुफाओं का प्रयोग बौद्ध भिक्षु विहार या निवास स्थल के रूप में करते थे। जबकि प्रारंभिक गुफाओं का प्रयोग आजीवक करते थे। आगे चलकर ये गुफाएँ बौद्ध मठ कहलाने लगी। इन गुफाओं की प्रमुख विशेषता चमकदार पॉलिशदार भीतरी दीवारें एवं अलंकृत प्रवेश द्वार हैं।
उदाहरण- बिहार में स्थित बराबर एवं नागार्जुनी गुफाओं का निर्माण अशोक एवं उनके पौत्र दशरथ के शासनकाल में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में किया गया था।

Cave Architecture- Cave architecture originated in that time. These caves of Maurya period were made by cutting stone. These caves were used by Buddhist monks as monasteries or residences. Whereas the early caves were used by the Ajivaks. Later on these caves came to be called Buddhist Monastery. The main feature of these caves are the shiny polished interior walls and ornate entrance gates.
Example-The Barabar and Nagarjuni caves in Bihar were built during the reign of Ashoka and his grandson Dasharatha in the 3rd century BC.

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नासिक की गुफाएँ- नासिक की गुफाएँ 24 बौद्ध गुफाओं का समूह है। इन्हें 'पांडव लेनी' कहा जाता है। इन गुफाओं का निर्माण प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईसवी के मध्य हुआ था। ये गुफाएँ मुख्य रूप से हीनयान संप्रदाय से संबंधित थीं। किंतु बाद में इन गुफाओं में महायान संप्रदाय का प्रभाव भी देखा गया। हीनयान संप्रदाय के अंतर्गत यहाँ पर बुद्ध की उपस्थिति को प्रदर्शित करने के लिए सिंहासन एवं पदचिन्ह का निर्माण किया गया था। वहीं महायान संप्रदाय के अंतर्गत यहाँ पर बुद्ध की मूर्ति स्थापित की गयी थी। यहाँ की जल निकास प्रणाली उत्कृष्ट है। यहाँ पर पत्थरों को काटकर तालाब का निर्माण किया गया है।

Nashik Caves- Nashik Caves are a group of 24 Buddhist caves. They are called 'Pandava Lenny'. These caves were constructed between 1st century BC to 3rd century AD. These caves mainly belonged to the Hinayana sect. But later the influence of Mahayana sect was also seen in these caves. Under the Hinayana sect, the throne and footprint were built to represent the presence of the Buddha here. At the same time, an idol of Buddha was established here under the Mahayana sect. The drainage system here is excellent. Here the pond has been made by cutting stones.

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मूर्तिकला- मौर्य काल में मूर्तियों का मुख्य रूप से उपयोग स्तूपों की सजावट, तोरण एवं मेधी में और धार्मिक अभिव्यक्ति के लिये किया जाता था। तत्कालीन समय की दो प्रसिद्ध मूर्तियाँ यक्ष और यक्षिणी की हैं। ये तीनों धर्मों (जैन, बौद्ध और हिंदू) में पूज्यनीय हैं। यक्षिणी का सबसे पुराना उल्लेख तमिल रचना 'शिल्पादिकारम्' में मिलता है। इसी प्रकार, सभी जैन तीर्थकर यक्षिणी से संबंधित थे।

Sculpture- In the Mauryan period, idols were mainly used for decoration of stupas, pylons and medhis and for religious expression. Two famous idols of that time are of Yaksha and Yakshini. They are revered in all three religions (Jain, Buddhist and Hindu). The earliest mention of Yakshini is found in the Tamil composition 'Shilpadikaram'. Similarly, all Jain Tirthankaras were related to Yakshini.

मृद्भाण्ड- मौर्य काल के मृद्भांड उत्तरी काले पॉलिशदार मृद्भांड (NBPW) या चित्रित धूसर मृदभांड कहलाते हैं। इनकी प्रमुख विशेषता काला रंग एवं चमकदार पॉलिश है। इन पर सामान्यतः विलासिता की वस्तुएँ रखी जाती थीं। ये प्रायः उच्चतम स्तर के मृद्भांड कहलाते हैं।

Pottery-Mauryan pottery called Northern Black Polished Ware (NBPW) or Painted Gray Ware are called. Their main feature is black color and shiny polish. These were usually placed on luxuries. These are often called highest level pots.

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धन्यवाद।
R F Temre
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