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ज्वारीय ऊर्जा का दोहन कैसे किया जाता है? | How Is Tidal Energy Harnessed?

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ज्वार भाटा और ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Ebb And Tidal Energy)

पृथ्वी घूर्णन गति करती है। पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल के कारण चंद्रमा उसकी ओर आकर्षित होता है। इस कारण पृथ्वी के सागरों में जल का स्तर चढ़ता और गिरता रहता है। चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से प्रत्येक 12 घंटे में एक ज्वारीय चक्र संपन्न होता है। इस परिघटना को 'ज्वार भाटा' कहा जाता है। ज्वार भाटा में जल के स्तर के ऊपर उठने एवं गिरने के कारण 'ज्वारीय ऊर्जा' प्राप्त होती है।

The earth rotates. The Moon is attracted to the Earth due to its gravitational force. Due to this, the water level in the earth's oceans keeps rising and falling. Due to the gravitational force of the Moon, a tidal cycle occurs every 12 hours. This phenomenon is called 'tidal reflux'. 'Tidal energy' is obtained due to the rise and fall of the water level in the tides.

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ज्वारीय ऊर्जा का दोहन (Harnessing Tidal Energy)

ज्वारीय ऊर्जा का दोहन करने के लिए सागर के किसी संकीर्ण क्षेत्र पर बाँध बनाया जाता है। इस बाँध के द्वारा ज्वारीय ऊर्जा को प्राप्त किया जाता है। बाँध के द्वार पर 'टरबाइन' स्थापित की जाती है। यह टरबाइन, ज्वारीय ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर देती है। इस प्रक्रिया के लिए सर्वप्रथम ज्वार के पानी को उच्च ज्वार के दौरान एक बैराज में एकत्रित किया जाता है। साथ ही कम ज्वार के समय हाइड्रों टरबाइन के माध्यम से दबाव (प्रेशर) दिया जाता है। ज्वारीय ऊर्जा के दोहन के लिए बहुत मेहनत लगती है। ज्वारीय ऊर्जा वाले बिजली संयंत्रों की पूँजी लागत बहुत अधिक होती है। ज्वारीय ऊर्जा क्षमता से पर्याप्त शक्ति प्राप्त करने के लिए उच्च ज्वार की ऊँचाई निम्न ज्वार से कम से कम 5 मीटर (16 फीट) से अधिक होनी चाहिए। ऐसा होने पर ही ज्वारीय ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है।

A dam is built on a narrow area of ​​the ocean to harness tidal energy. Tidal energy is obtained through this dam. 'Turbine' is installed at the entrance of the dam. This turbine converts tidal energy into electrical energy. For this process, tidal water is first collected in a barrage during high tide. Also during low tide pressure is given through hydro turbine. Harnessing tidal energy takes a lot of effort. The capital cost of tidal power power plants is very high. The height of the high tide must be at least 5 meters (16 ft) above the low tide in order to derive sufficient power from the tidal energy potential. Only then can tidal energy be produced.

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भारत में ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy In India)

भारत में ज्वारीय ऊर्जा के संभावित क्षेत्र निम्नलिखित हैं–
1. पश्चिमी तट पर केंबे की खाड़ी
2. गुजरात में कच्छ की खाड़ी।
भारत में गुजरात की खाड़ी तथा कैंबे की खाड़ी पर ज्वारीय ऊर्जा की क्षमता विद्यमान है। भारत के समुद्र तट की कुल लंबाई 7516 किलोमीटर है। इन समुद्र तटों के द्वारा प्राप्त होने वाली ज्वारीय ऊर्जा की क्षमता 12455 मेगावाट के आसपास है।

The following are the potential areas of tidal energy in India–
1. Gulf of Cambay on the west coast
2. Gulf of Kutch in Gujarat.
Tidal energy potential exists in India on the Gulf of Gujarat and the Gulf of Cambay. The total length of the coastline of India is 7516 km. The tidal energy potential of these beaches is around 12455 MW.

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I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
rfcompetiton.com

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