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बानी जगरानी की उदारता बखानी जाइ― केशवदास

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"सरस्वती-वंदना"

बानी जगरानी की उदारता बखानी जाइ,
ऐसी मति उदित उदार कौन की भई।
देवता प्रसिद्ध सिद्ध रिषिराज तपबृद्ध,
कहि-कहि हारे सब कहि न काहू लई।
भावी भूत बर्तमान जगत बखानत है,
केशोदास क्योंहू ना बखानी काहू पै गई।
पति बर्ने चारमुख पूत बर्ने पाँचमुख,
नाती बर्ने षटमुख तदपि नई नई।

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संदर्भ― प्रस्तुत पद्यांश 'सरस्वती वंदना' नामक शीर्षक से लिया गया है। इसकी रचना महाकवि 'केशवदास' ने की है।

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प्रसंग― प्रस्तुत पद्यांश में माँ सरस्वती की प्रशंसा करते हुए उनकी उदारता (महिमा) का वर्णन किया गया है।

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महत्वपूर्ण शब्द― बानी- वाणी या माँ सरस्वती, जगरानी- जगत की स्वामिनी, उदारता- महिमा या बड़प्पन, बखानी जाइ- वर्णन करना, मति- बुद्धि, उदित- प्रगट, तपवृद्ध- अधिक तपस्या करने वाले, भावी- भविष्य काल, भूत- बिता चुका काल, जगत- संसार, पति- ब्रह्मा जी, पूत- शिव जी, नाती- कार्तिकेय जी, तदपि- फिर भी।

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11. द्विरुक्ति शब्द क्या हैं? द्विरुक्ति शब्दों के प्रकार

व्याख्या― आचार्य केशवदास जी कहते हैं, कि इस संपूर्ण संसार में किसकी बुद्धि ऐसी है, जो जगत की स्वामिनी माँ सरस्वती की उदारता (महिमा) को शब्दों में प्रकट कर सके और इसका उचित बखान कर सके। अर्थात् ऐसा कोई नहीं है। बड़े-बड़े देवता, प्रसिद्ध सिद्ध, संत, महात्मा, विद्वान, अधिक तपस्या करने वाले ऋषि-मुनि आदि ने भी माँ सरस्वती की उदारता का बखान करने का प्रयत्न किया किंतु वे भी यह कार्य करने में असफल हो गए। भूतकाल, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों में माँ सरस्वती की महिमा का बखान करने का प्रयास किया गया है, किंतु फिर भी उनकी महानता का उचित वर्णन नहीं हो पाया है। अन्य संसारी मनुष्यों के साथ-साथ महाकवि केशवदास ने भी माँ सरस्वती की उदारता का बखान करने का प्रयास किया किंतु वे भी इस कार्य को करने में असफल रहे। माँ सरस्वती के निकट संबंधी भी उनकी महिमा का उचित वर्णन नहीं कर पाए। उनके पति ब्रह्मा अपने चार मुखों से, पुत्र शिव अपने पाँच मुखों से और उनके पौत्र कार्तिकेय अपने छह मुखों से माँ सरस्वती की उदारता का वर्णन करने का प्रयास करते हैं। फिर भी उनकी महिमा का उचित वर्णन नहीं हो पाया है। प्रत्येक क्षण माँ सरस्वती की उदारता में नए-नए परिवर्तन होते रहते हैं। उनकी उदारता चिरनूतन और अभिनव है।

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काव्य सौंदर्य― 1. ब्रजभाषा का सटीकता के साथ प्रयोग किया गया है।
2. कवित्त (दंडक) छंद का प्रयोग किया गया है।
3. अनुप्रास, पुनरुक्ति प्रकाश और रूपक अलंकार का प्रयोग किया गया है।
4. यह एक सरस्वती वंदना है। इसमें माँ सरस्वती की उदारता को प्रस्तुत किया गया है।

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आशा है, उपरोक्त जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी।
धन्यवाद।
R F Temre
rfcompetition.com



I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
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